Friday, 22 February 2013
ये पल
हर क्षण भागते ये पल
दौड़ कर थाम लूँ
या बाहें फैला
रोक कर
पूछती हूँ जब
क्यू ?
तुम मुझे ले आये
वहां से
जहाँ ,मेरा बचपन बीता ...
हाथों के नीचे निकलकर
छूटकर भागते हुए
पूछा उसने
क्यू ?
खुश नही हो
तुम्हे जो दी जिंदगी नई
दिया परिवार नया
दी जिम्मेदारियां कई
मैंने कब कहा की
खुश नही मै
निभाई है जिम्मेदारियां
बखूबी
भूल कर अस्तित्व सारा
अब ,जब तुम मिले हो
इतने सालों बाद
सिर्फ मेरे लिए
तो लगता है
कितना
बतियाऊं मै
कितना
सजाऊ सवारूँ घर
और सुनूँ गाने नये
कितना ही पढूं
किस्से और कहानियाँ
चाहूँ कर लूँ
कितना ही
घर के काम नये
सुनो ना.......
पर यादों में बसे
हर वो पल है सबसे खास
जिनमे बच्चे होते है पास
देखा ना तुमने भी
बोलो ना ...........:)
*नीता *
Monday, 11 February 2013
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