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Tuesday, 27 January 2015

हरेक बात की अब हद्द  हो गई
बात न करुँगी  अब जिद हो गई

दिल में मेरे अब खलिश हो गई
तुझसे मेरी अब रंजिश हो गई 

Sunday, 11 January 2015

क्षणिकाएं

कड़ाके की ठण्ड में
सडको पर
सिग्नल पर
कार के पास दौडती
दो रोटी के लिए
हाथ फैलाती जिन्दगी
कभी रोती
कभी मुस्काती
गुनगुनी ताप लिए
कब नया दिन
निकलेगा।
***नीता परिहार ***