रात भर स्मृतियाँ झरती रही
हरसिंगार के फूलों सी
डाल डाल पर फुदकता रहा
अहसास चिड़ियों सा
रात चांदनी सजती रही
नई नवेली दुल्हन सी
मन महकता रहा
फूलों की खुशबू सा
रात चांदनी चमकती रही
शबनम की बूंदों सी
दिल मचलता रहा
ख़्वाबों के पूरा होने
के हकीकत सा
हल्की से ठंडक लिए भोर
किरणें बिखेरती रही
मन बहकता रहा
ज़ज्बातों सा ..............नीता परिहार

