Text selection Lock by Hindi Blog Tips

Monday, 8 September 2014

कुदरत












सारे जगत में देखो ,मचा है हाहाकार 
त्रासदी ने लिया है विशाल आकार !
यूँ,न करो कुदरत से छेड़छाड़,
भोगने पड़ेंगे तुम्हे अत्याचार !
प्रकृति ने, मचाया है जलजला,
नज़र गयी जिधर हर ओर चीत्कार!
स्वभाव मानव का देख विकराल ,
अम्बर भी बरसाने लगा अंगार !
जान जो,अदिति है जिसकी आभा ,
आओ,सब मिल करें धरा का श्रृंगार !
पहनाएं इसे पर्यावरण का हार !!

*****नीता परिहार *****  

Friday, 5 September 2014

रिश्तों से उम्मीदे बढती ही चली जाती  है
जिन्दगी ख़ुशी चाहती है,दर्द दिए जाती है 

Tuesday, 2 September 2014

मुक्तक


















 है बेसबब तेरी रहमतो  का  साया
 बन कर रहना हमेशा  मेरी  छाया
 हाथ उठाते ,दुआ क़ुबूल हो जाती है
 खिल उठती है तेरे संग मेरी काया