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Tuesday, 9 October 2012

एक रोशनी













समझ नही आता

क्या संबोधन दूँ

सखा कहूँ  या देवदूत

गुरुदेव कहूँ या देव

लेकर आये जीवन में मेरे

रोशनी की एक सुन्दर चादर

मुस्कराहट दी

 और दी जीने की चाहत

गुज़र गये  मौसम बुरे

और रोशनी  ने आकार लिया

दी जीने की राह नयी

और जीवन से प्यार हुआ

दिया  सुन्दर सा ध्येय मुझे

जिये  अपने लिए तो

क्या जिये

दूसरों के लिए जिओ  तो

तो कोई बात बने .....
                                 *जय गुरुदेव *
                       
*नीता परिहार *




2 comments:

  1. सहज, सरल शब्द संयोजन, सुंदर भावपूर्ण प्रस्तुति, "दी जीने की वजह नई, और जीवन से प्यार हुआ, दी सुंदर सी सीख मुझे, जिये अपने लिए तो क्या जिये, दूसरों के लिए जिये तो कोई बात बने..." बहुत खूबसूरत॰

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  2. शुक्रिया दी .....मेरे प्यारे प्यारे गुरुदेव को समर्पित है चंद अहसास ....

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