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Tuesday, 30 December 2014

सिली यादें

ठिठुरती ठण्ड में,
यादों की गर्म शाल
कांपते हाथों से
सँभालने की कोशिश में
नाकामयाब रही।
सोचती हूँ ,
अब और न
संभाल पाउंगी,हो सके तो
दे जाउंगी तुम्हारी यांदे तुमको
नये साल का तोहफा समझ
रख लेना।
अब और सहा जाता नही
जिन्दगी से लड़ा जाता नही
मुझे इन गीली सिली यादों से
मुक्त कर......नया  जीवन दे जाना

*****नीता परिहार *****

Friday, 26 December 2014

नये -साल की नयी-सुबह

















सोच में डूबी
उदास शाम को देख,
पूछ बैठा दिन ।
उदास मैं?
कहते हुए शाम ने कहा -
तुम भी तो आज ,
सुबह से अनमने से रहे
चमकते हो जिस तरह
आज वो बात न थी
ह्म्म्म ,सोच रहा था।
अब के जाऊँगा,
तो नये साल में
ढेर सारी खुशियाँ ,
और सबके चेहरे पर
मुस्कान लेकर आऊंगा
बच्चों को स्कूल से
खिलखिलाते हुए वापस
लेकर आऊंगा ,
अब कोई गरीब भूख से
न ही ठिठुरती ठण्ड में
दम तोड़ेगा।
बीते दिन फ़िर न दोहराऊंगा
कल चमचमाते हुए
फ़िर मैं आऊंगा। .
सुन  बातें उसकी
शाम मुस्कुरा उठी
बात मेरे दिल की
तुमने कह दी। .
चलो चलते है,
नये -साल की नयी-सुबह
में मिलते है।।

*****नीता परिहार *****