सोच में डूबी
उदास शाम को देख,
पूछ बैठा दिन ।
उदास मैं?
कहते हुए शाम ने कहा -
तुम भी तो आज ,
सुबह से अनमने से रहे
चमकते हो जिस तरह
आज वो बात न थी
ह्म्म्म ,सोच रहा था।
अब के जाऊँगा,
तो नये साल में
ढेर सारी खुशियाँ ,
और सबके चेहरे पर
मुस्कान लेकर आऊंगा
बच्चों को स्कूल से
खिलखिलाते हुए वापस
लेकर आऊंगा ,
अब कोई गरीब भूख से
न ही ठिठुरती ठण्ड में
दम तोड़ेगा।
बीते दिन फ़िर न दोहराऊंगा
कल चमचमाते हुए
फ़िर मैं आऊंगा। .
सुन बातें उसकी
शाम मुस्कुरा उठी
बात मेरे दिल की
तुमने कह दी। .
चलो चलते है,
नये -साल की नयी-सुबह
में मिलते है।।
*****नीता परिहार *****

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