ठिठुरती ठण्ड में,
यादों की गर्म शाल
कांपते हाथों से
सँभालने की कोशिश में
नाकामयाब रही।
सोचती हूँ ,
अब और न
संभाल पाउंगी,हो सके तो
दे जाउंगी तुम्हारी यांदे तुमको
नये साल का तोहफा समझ
रख लेना।
अब और सहा जाता नही
जिन्दगी से लड़ा जाता नही
मुझे इन गीली सिली यादों से
मुक्त कर......नया जीवन दे जाना
*****नीता परिहार *****
यादों की गर्म शाल
कांपते हाथों से
सँभालने की कोशिश में
नाकामयाब रही।
सोचती हूँ ,
अब और न
संभाल पाउंगी,हो सके तो
दे जाउंगी तुम्हारी यांदे तुमको
नये साल का तोहफा समझ
रख लेना।
अब और सहा जाता नही
जिन्दगी से लड़ा जाता नही
मुझे इन गीली सिली यादों से
मुक्त कर......नया जीवन दे जाना
*****नीता परिहार *****





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