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Tuesday, 30 December 2014

सिली यादें

ठिठुरती ठण्ड में,
यादों की गर्म शाल
कांपते हाथों से
सँभालने की कोशिश में
नाकामयाब रही।
सोचती हूँ ,
अब और न
संभाल पाउंगी,हो सके तो
दे जाउंगी तुम्हारी यांदे तुमको
नये साल का तोहफा समझ
रख लेना।
अब और सहा जाता नही
जिन्दगी से लड़ा जाता नही
मुझे इन गीली सिली यादों से
मुक्त कर......नया  जीवन दे जाना

*****नीता परिहार *****

Friday, 26 December 2014

नये -साल की नयी-सुबह

















सोच में डूबी
उदास शाम को देख,
पूछ बैठा दिन ।
उदास मैं?
कहते हुए शाम ने कहा -
तुम भी तो आज ,
सुबह से अनमने से रहे
चमकते हो जिस तरह
आज वो बात न थी
ह्म्म्म ,सोच रहा था।
अब के जाऊँगा,
तो नये साल में
ढेर सारी खुशियाँ ,
और सबके चेहरे पर
मुस्कान लेकर आऊंगा
बच्चों को स्कूल से
खिलखिलाते हुए वापस
लेकर आऊंगा ,
अब कोई गरीब भूख से
न ही ठिठुरती ठण्ड में
दम तोड़ेगा।
बीते दिन फ़िर न दोहराऊंगा
कल चमचमाते हुए
फ़िर मैं आऊंगा। .
सुन  बातें उसकी
शाम मुस्कुरा उठी
बात मेरे दिल की
तुमने कह दी। .
चलो चलते है,
नये -साल की नयी-सुबह
में मिलते है।।

*****नीता परिहार *****


Sunday, 23 November 2014

तुम















ख़्वाबों में मिली
एक परी थी
पूरी हो यही
कामना थी
यश से भरी
झोली थी
बिंदिया थी
चूडियाँ थी
पायल थी
चांदनी रात थी
ओस थी,आस थी
इंतज़ार में तेरे
साँस थी
आँखों में
नमी थी
बस एक तेरी
कमी थी
सौगात में मिल
जाओ मुझे "तुम"
ऐसी एक प्यास थी !!
*****नीता परिहार ****

Saturday, 8 November 2014

गजल


झूठ सुना कर मत उलझा कर
बेहतर  है तू सच बोला कर

दिल की बात रहे अब दिल में
राज़ दिलों के मत खोला कर

दुनिया में है और बहुत कुछ
दिल से तू बाहर निकला कर

खुशियाँ बाँट नही सकता गर
बीज न नफरत के बोया कर

दिल का हाल सुनाऊं कैसे
दिल से दिल बहलाया कर !!

*****नीता परिहार *****






Friday, 7 November 2014

हायकू

खिलती सांझ
डूब गया सूरज
निकला चाँद

हर्षित मन
बावला हुआ जाए
उड़ता फिरे

जी हुआ जाए
शायराना सा मेरा
तन्हाई गाये

 डूबा डूबा सा
 दिल हुआ जाता है
 याद सताये !!

नीता परिहार



Sunday, 2 November 2014

माँ



दिन-रात परवरिश,

करने वाली *माँ*

कहाँ वह अपनी,

देखभाल  कर पाती है /

इंतज़ार में बच्चों के,

आँखे पथरा जाती है/

सुन कोई एक आवाज़,

दौड़ दरवाज़े तक आती है/

देतीं है दुआएं हर-पल ,

खुश है बच्चे सोच ,

आत्म संतुष्टी पाती है /

कर स्रष्टि का सृजन

संसार की भीड़ में वो

खुद को अकेला पाती है!!

*****नीता परिहार *****



Wednesday, 29 October 2014

एक नदी ने कहा

     नदी ने कहा

कितनी,गहरी थी मैं !

मानव ने  संहार किया,

अब उथली हूँ मैं !

छेड़ा है तुमने मुझको ,

अब आक्रोश में रहती हूँ मैं !

शीतल झरने सी बहने वाली ,

अब सूख चली हूँ मैं !

चंचल सी कल कल करने वाली

जलजला मचा रही हूँ मैं !

और इंतज़ार अब न करवाना ,

रक्षक बनकर मेरे आना।

तुम मुझसे हो, तुमसे हूँ मैं



*****नीता परिहार *****












Monday, 27 October 2014

रिश्तों की भीड़ में ,

खुद को भुला दिया !

जा चुके थे लोग ,

देखा ,जब होश

आया हमें !

रिश्तों को बना कर खेल

जुआरी बन बैठे लोग

नफ़ा नुकसान की

बिछा चौपड़ ,

रिश्तों का दाँव लगा बैठे !

हिमाकत बस हमारी

इतनी सी

सोचा ज़रा बस

अपने लिए

अपनों  ने हमें

दुश्मन बना  लिया  !!

*****नीता परिहार *****

Wednesday, 22 October 2014

रिश्तें

गुजरती हूँ ज़र्ज़र हुए ,

दिल के गलियारे से कभी

जहाँ गुज़ारे थे चंद रोज़ कभी !

मिलते है लम्हात,कुछ बिखरे

तो कुछ संभले हुए,

कुछ मीठे शर्बत हुए

कुछ खारे समन्दर !

मिला एक लम्हा ज़मी पर,

सिसकता सा !

चाहा था उठाना मगर

भारी था रिश्तों पे ,

अहम का जो मारा निकला

टूट कर भी रूहानी रिश्तें ,

दिल में जिंदा रहा करते है !

हर ख़ुशी में, थोड़ी टीस

दिया करते है !

भुला देने की जिद में ,

मशरूफियत में भी

याद रहा करते है !

*****नीता परिहार *****








Monday, 8 September 2014

कुदरत












सारे जगत में देखो ,मचा है हाहाकार 
त्रासदी ने लिया है विशाल आकार !
यूँ,न करो कुदरत से छेड़छाड़,
भोगने पड़ेंगे तुम्हे अत्याचार !
प्रकृति ने, मचाया है जलजला,
नज़र गयी जिधर हर ओर चीत्कार!
स्वभाव मानव का देख विकराल ,
अम्बर भी बरसाने लगा अंगार !
जान जो,अदिति है जिसकी आभा ,
आओ,सब मिल करें धरा का श्रृंगार !
पहनाएं इसे पर्यावरण का हार !!

*****नीता परिहार *****  

Friday, 5 September 2014

रिश्तों से उम्मीदे बढती ही चली जाती  है
जिन्दगी ख़ुशी चाहती है,दर्द दिए जाती है 

Tuesday, 2 September 2014

मुक्तक


















 है बेसबब तेरी रहमतो  का  साया
 बन कर रहना हमेशा  मेरी  छाया
 हाथ उठाते ,दुआ क़ुबूल हो जाती है
 खिल उठती है तेरे संग मेरी काया

Sunday, 17 August 2014

मेरे अहसास

कल किसी ने पूछा मुझसे,
बिटिया की शादी आर्मी केप्टन से कर दी
जो इस समय,कश्मीर की सीमाओं पर तैनात
डर नही लगता तुम्हें?

कहा मैंने ,जब मैं निकलती हूँ सड़को पर.
देखती हूँ गाड़ियों की तेज़ रफ़्तार
तब डर लगता है मुझे ..........

छोटी छोटी बच्चियां जाती है जब स्कूल ,
पढ़ने के लिए,अपनो से दूर रह रही
बच्चियां शहरों में अकेली
तब डर लगता है मुझे .…

बस में ,ट्रेन में सफर कर रहीं अकेली ,
अँधेरी रात में किसी काम से
निकलना पड़े किसी महिला को
तब डर लगता है मुझे .

सीमा पर तैनात वीर जवान
जो सुरक्षा में हमारी,उनके लिए डर कैसा?
ईश्वर का साथ और माँ की दुआएं
होती है उनके पास ,उनके लिए डर नही ,
गर्व होता है मुझे ,गर्व होता है मुझे।।।।

*****नीता परिहार *****





Saturday, 9 August 2014

फर्ज़


चलो उठो
देश के लिए,
 कदम से कदम मिलाओ
अपना फ़र्ज़ निभाओ!!

क्या हुआ,गर तुम
सीमा पर तैनात न हो,
इनकम टैक्स भर
अपना फ़र्ज़ निभाओ!!

बस तुम  इतना करो
ज़ज़्बात है अगर तुममे
ज़िंदा दिली से,
 नि:सहायो कीसेवा कर
अपना फ़र्ज़ निभाओ!!

देश की स्वच्छता के लिए
बस इतना सा
श्रमदान कर,
अपना फ़र्ज़ निभाओ!!

लगा कर पेड़ पौधे,
धरती को अलंकृत कर
अपना फ़र्ज़ निभाओ

 क्या इधर उधर
 की लेकर बैठे हो तुम,
 नई ऊर्जा का संचारकर
 उदास चेहरों में मुस्कान खिला
 रक्त दान कर
 अपना फ़र्ज़ निभाओ!!

अपने लिए जिए तो क्या जिए
देश के लिए छोटी छोटी सी
ज़िम्मेदारी उठा कर
अपना फ़र्ज़ निभाओ!1

सबका साथ ,सबका विकास
की तर्ज़ पर,काम कर
अपना फ़र्ज़ निभाओ
अपना फ़र्ज़ निभाओ  ..........

 *****नीता परिहार *****






वीर हो तुम


वीर हो तुम
सीमा पर तैनात
ज़ज्बा तुम्हारा

रक्षा बंधन
रीत निभाई तूने
दीर्घायु भवः

माँ और पत्नी
इंतज़ार में तेरे
बाट जोहती

जय जवान
सुरक्षा है तुमसे
सलाम तुम्हे

नीता परिहार 

Monday, 4 August 2014

"रक्षा बंधन विशेष "


              बहना बोले

आया सावन में राखी का त्यौहार
बहना मांगे भाई से प्यारा उपहार
रेशम की डोर सा नाज़ुक है रिश्ता
 दे दे भैया इस बार सोने का हार

             भैया बोले

तेरी ज़िद के आगे मैं तो गया हार
याद रखना,भेजना राखी हर साल
मनाऊं कैसे भाभी तेरी जले बारम्बार
देता हूँ तुझे मैं आशीर्वाद तुझे हज़ार
 
            भाभी बोले

क्यों बदनाम करे हो मुझे हर बार
ये तो है प्रेम और सौहाद्र का त्यौहार
जाओ तुम, बंधवा आओ राखियाँ
देना मेरी भी तरफ से दुआएं  हज़ार

*****नीता परिहार*****


Friday, 25 July 2014

"तांका"



 मैं कुछ कहूँ
 सुन तो रहे हो न
 न कहना कि
 मैंने बताया नही
 बात जो सुनाना था !!


आया सावन
मन भायी सखियाँ
पड़ीं फुहारें
चलें झूला झूलने
आओ सखियाँ।

@नीता परिहार


Sunday, 20 July 2014

वो बारिश के दिन














 ये बरिश की बूंदें जब भी
 बरसती  है ......
 ये आँखे इंतज़ार में तेरे 
 तरसती है ...........
 मन के आंगन में साथ
 अपने यादों के मोती
 लिए आती है ..........
 अश्क जब कोरों में 
 बूंद बन झिलमिलाते है 
 विरह में तेरे जिन्दगी 
 जीने को मजबूर 
 हुए जाती है .........
 ये गुजारिश है तुमसे 
 अबकी जब तुम जाना 
 संग अपने ये 
 सिली यादें भी ले जाना 
 ले जाना वे सपने भी
 जिन्हें देख अब भी अँखियाँ 
 लरजती है  ........
 *****नीता परिहार***** 








मंजिल















 पगडण्डी से होते हुए
 पहुंचकर चौराहे पर
 मंजिल दूर ही सही
 भटक न जाना तुम
 राह में कहीं डर कर
 अटक न जाना तुम
 कटीली ,पथरीली
 राहों पर चलकर
 मंजिल को पा ही
 जाना तुम .....

*****नीता परिहार *****









Friday, 18 July 2014

गजल

नीला नीला अम्बर हो जब
धीरे धीरे तब आया कर

आउंगा रातों में मिलने
कह कर तू ये मत जाया कर

यादों से तेरी जिन्दा हूँ
यादों में तू आ जाया कर

वादा करके मत भूला कर
अक्सर मुझको याद किया कर

ऐसा होता तो वो होता
मुझको तू मत बहलाया कर

*****नीता परिहार *****


Thursday, 17 July 2014

हायकू

आया सावन
रिमझिम फुहारें
गाएंगे हम

कोयल संग
कज़रियाँ प्यारी
नाचेंगे मोर

भीगेंगे हम
खाएंगे पकौड़े भी
चाय के संग

झूमे किसान
भर गए है खेत
रोपेंगे बीज

*****नीता परिहार *****

Tuesday, 15 July 2014

सावन आयो




















वसुंधरा इतने दिवस  से धरे हुए थी धीर
बादल,बरसे खोल दिल होकर आज अधीर.. 

 रुत भी गाने लगी राग हुआ मल्लार 
 खिल उठी साँझ है बहने लगी समीर 

 कोकिल स्वर गूंज रहे ,मेघ गरजे आज 
मन ख़ुशी से झूम उठा करे मयूर पुकार 

धरती ने पायी हरियाली ,पोखे भरे नीर 
सावन की बौछार से भर गए नदिया तीर 




   


   

Monday, 30 June 2014

था जो शेष



मेरी है न तेरी है
है गरीबी की कहानी
सपनों में पल रही ख्वाइशे
आकाश में पंख फैला
चाह रही थी उड़ना
 पर जो था शेष
 होना था वही
भाग्य ने अपना काम किया
हालत के आगे
जीने को मजबूर किया
खुरचन  पर पल रही थी
जिंदगी एक नही दो
दिन भर की मेहनत
और मिलना दो निवाले
बोनस में थी गालियाँ.
त्रासदी में जब्त भावनाएं
कब होंगी आज़ाद
जाने कब हालात
 होंगे तुम्हारे साथ
उठा कर सर जी सकोगे
सम्मान के साथ ...
*****नीता परिहार *****

Sunday, 1 June 2014

एक कदम बचपन की ओर

 एक कदम बचपन की ओर











बचपन भी भला
कोई भुला है
हंसी यादों का
ये मेला है


रोज़ रात एक
दादी की कहानी
एक था राजा
एक  थी रानी

वो चंदा मामा
दूर के
पुए  पकाए
गुड के

सप्तऋषि तारे
सूत कातती बुढ़िया
भला कौन
भूला है

 जी किया जब भी
अब भी यादों में
 बचपन में
चली जाती हूँ

चार लम्हे ख़ुशी
के अपनों के संग
बिता आती हूँ

वो अल्हड बचपन
न कोई गिला
न शिकवा
मस्ती में जिए
जाते है ...........
चलो फिर  एक कदम बचपन की ओर
चले जाते है
*****नीता परिहार *****










Friday, 30 May 2014

बरसात
















क्यूँ चले आये बादल बरसते हुए
याद आयेंगे अब पल गुजरते हुए

रात है महकी महकी हुई सी अभी
बिछ गये फूल राहों में झरते हुए

बह गई बूँदें पलकों पे ठहरी हुई
बारिशे हुई यूँ  कुछ लरजते हुए

बहकी बहकी सी बातें हुई रात भर
सुबह भी हो गई फिर चहकते  हुए

पी निगाहों से थोड़ी सी मय झूम के
घर चली आई नीता बहकते हुए ..............


*****नीता परिहार *****






Thursday, 22 May 2014

यादों की बारिश
















कल रात
आयी थी 
यादों की बारिश 

वो आँगन में सोना 
संग दादा का बिछौना 
घर पर बस तब 
एक ही पंखे का होना 

कल रात आयी थी 
यादों की बारिश 
गीत माला सुनना 
दादी का लोरी सुनाना 

वो भाग कर 
लुका छिपी में 
मुंडेर पर आना 
दोपहरी भर खेलना 

चोरी छिपे बैठ कर 
इमली खाना और 
खरबूजों की
दावतें उड़ाना 

वो बारिश की बूंदे 
और बहते पानी में
इठलाते हुए
कश्तियाँ चलाना 

कल रात आयी थी 
यादों की बारिश 
अमराई जाना 
फूलों का चुराना 

अब आँगन रहे 
न अमराई 
बचपन को किताबों में
गंवाना ,न रूठना न मनाना 

बस अब रह गया यही
जीवन की आपाधापी 
सबके हिस्से में आना
किसी  के घर आना न जाना .........:)

*****नीता परिहार *****












Sunday, 11 May 2014

फितरत



















आज प्यार में धोखा कितना आसान हो गया
प्यार को निभा गया जो वो अहसान हो गया

तबियत घबराती है अब इन्सां को देखकर 
फितरत बदलकर वो आज शैतान हो गया

खुदा भी पूछे अब तुझे क्या इंसान हो गया
खुशियों को भूला आज परेशान  हो गया

जाने क्या हवा लगी या नजर जमाने को
आदमी चलती फिरती दूकान हो गया !!
       
*****नीता परिहार *****



Wednesday, 7 May 2014

तन्हाई
















ढल गया चाँद आज फिर तन्हा
दिल का टूटा है साज़ फिर तन्हा

कुछ भी बाकी रहा न कहने को
कैसे छुपता ये राज़ फिर तन्हा

चाँद तकता है आज फिर मुझको
क्यूँ मुझे हो न नाज़ फिर तन्हा

छीन कर चैन और दिल का सुकूँ
कर दिया मुझको आज फिर तन्हा

गीत कोई दिल से जब गाओगे
अब न होगी आवाज़ फिर तन्हा


*****नीता परिहार *****


Saturday, 3 May 2014

राजनीती

इन दिनों निकली
चुनाव की रैली है
जिधर देखो उधर
अराजकता फैली है
देश की यहाँ
किसको  पड़ी है
सबकी मानसिकता है
मैली है
बद-जुबानी तो देखो
जैसे बुरा न
मानो होली है
राई का पहाड़
बनाने का हुनर
कोई इनसे सीखे
राजनेता और मिडिया
जैसे दामन और चोली है
अब गन्दी हो चली
राजनीति से
कितने जवानो ने
खाई गोली है
इन संवेदनहीन नेताओं
न जाने
कितनी टोली है
उखाड़ फेकों अब
इन्हें जड़ों से
इनके आगे जनता
बहुत रो ली है
 ***नीता परिहार ***



















Saturday, 26 April 2014

नारी
















नारी तुम सदैव ही
               देश का स्वाभिमान हो
चिर प्राचीर वर्षों से
               देश का अभिमान हो
गाड़े है तुमने झंडे अनेक
               वीरता की तुम शान हो
मातृत्व को गले लगाया (मदर टेरेसा )
               भारत माँ की आन हो
बनी तुम दुर्गावती,लक्ष्मीबाई
              तत्पर जान देने कुर्बान हो
गिरिजा देवी,बेगम अख्तर,लता
              ठुमरी,दादरा,गजल गीतों की तान हो
इंदिरा,कल्पना,किरण बन नेतृत्व किया
             तुम ही तो देश की शान हो
उषा,शान्ति तिग्गा हो या बचेन्द्रिपाल
              तुम सब गुणों की खान हो
बहती तुम अविरल,निश्छल नदियों सी
              सहजता ही तुम्हारी पहचान हो
भ्रूण हत्या, दहेज़ प्रताड़ना,अनाचार
             न अब तुम्हारा अपमान हो
बिखेरे है सब रंग तुम्हीं ने
             नारी तुम महान हो
             नारी तुम महान हो .
       
*****नीता परिहार *****


         

Friday, 25 April 2014

तुम जो मिली





















तुम जो मिली हो तो
निगाहों में बस गई हो

अब  हम सफर हो तो
नजारों  में बस गई हो

शाम ढल गई हो तो
सितारों में बस गई हो

सुबह जब हो तो
बहारों में बस गई हो...............

 *****नीता परिहार *****




इबादत

















हाथ उठाकर जब भी करता है इबादत
इबादत नही हरदम करता है शिकायत
रख भरोसा मुझ पर तू इतना
करता हूँ हरपाल तेरी हिफाजत .........

             *****नीता परहार*****

Saturday, 19 April 2014

जुदाई

















जब दिल से दिल की  बात चली
रोते रोते ................रात कटी

जब एक शाम याद की बात चली
कहते कहते .............रात कटी

जब उस जुल्म की बात चली
जगते जगते............रात कटी

 जब उनसे दूर जाने की बात चली
 तनहा तनहा  ...............रात कटी

जब उनसे जुदाई की बात चली
आँखों आँखों में ..........रात कटी
*****नीता परिहार *****









नज़्म



















बहुत हंसा हम पर जमाने ने
थोडा साथ तेरे हंसने हंसाने में

मिला हमें जो हमने चाहा न था
बीत गई उम्र रिश्ते निभाने में

किया करता था तू कभी वफ़ा की बातें
आज मजे ले रहा हमें जलाने में

तेरे इक आहट पाने के लिए
इंतज़ार था हमें एक जमाने में

जुदाई तो प्यार का  किस्सा  है
भरोसा है हमें तकदीर के मिलाने में


***नीता परिहार ***


दर्द






















दर्द जुदाई का मुझसे सहा जाता नही
टूटकर अब तुझे मनाना चाहती हूँ

 अब दे भी दो  सहारा मुझे तुम
 सर काँधे पर रख रोना चाहती हूँ

कर भी ले कुछ प्यार की बातें घडी भर
दर्द दिल का मैं सुनाना... चाहती हूँ

अश्क बन आँखों में बस ही गये तुम
क्यूँ मैं इनको अब बहाना चाहती  हूँ

कर भी ले अब प्यार की बाते दो घड़ी
दिल में बस एक कोना चाहती  हूँ

          ***नीता परिहार ***


Monday, 14 April 2014

इंतज़ार है मुझे















इंतज़ार है मुझे
तेरे आने का

खुशियों से कलियों
के चटक जाने का

खिल कर फूलों के
गुलशन में बिछ जाने का

खुशबू से मन के
महक जाने का

महक से ,तेरे
बहक के आने का

ले के खुदा का नूर
वो बसंत के आने का

क्या करोगे अब
अपने बहानों का

क्या वजह कहोगे
खिंच कर चले आने का ..........हम्म

****नीता परिहार ****

Monday, 7 April 2014

राजनीति

राजनीति गर्म मौसम में बड़ी गरमाई है
बेशर्म नेताओं से आज शर्म भी शरमाई है

तोड़ दिए भ्रष्टाचार के रिकार्ड सारे के सारे
 राजनीति भ्रस्ट नेताओं सेजो भरमाई है

लाचार और बेबस है सी ताक रही जनता
उनकी जान पर बन आई ये महंगाई है

मारा है बेरोज़गारी ने नवयुवको को
उम्मीद ही जगह ,आँखों में बेबसी छाई है

जागो विवेक से लो काम जब जागे तब सवेरा
वोट दो हर कोई परिवर्तन की लहर आई है



सपना


















देखा था हमने  हंसी सा एक सपना
जो हरदम  लगा था कुछ अपना

कोशिशे की हज़ार संभालने की
पर मजबूरियां थी बड़ी पड़ा खोना

बिखर जाते है खुली आँखों के सपने
लिखा हो गर किस्मत में रोना

रास्ता अब चुन लिया है हमने
मंजिले है अब मेरी खुशिया पाना








Sunday, 23 March 2014

चंद हायकू

किसान















सूखे है खेत
बंज़र है जमीन 
बहते आंसू 

खेत जोतता 
थक गया किसान 
चारा न पानी

क़र्ज़ में डूबा 
बंधाई थी उम्मीद 
वादा मुकरा 

ये न करना 
ख़ुदकुशी है पाप
हौसला रख

जागो किसान
लड़ो हक के लिए
बदलो सोच 

घिरे बादल 
हरसाई जमीन 
आई बारिश 

कीचड़ हुआ
खेत जोते किसान
रोपे  है बीज

फसल उगी
लहलहाए खेत
खिला चेहरा

दौड़ते बैल
गले में है घंटियाँ
आई खुशियाँ

हुआ विकास
किसान खुशहाल
देश समृद्ध ............
***नीता परिहार ***






Monday, 10 March 2014

लज्जा


बचपन से यही है जाना

हया  है नारी का गहना

मुश्किल घडी  में भी

 हर बात है सहना

चुप ही रह जन्मों तक

 संग है रहना

चाहे जो भी हो कभी

कुछ ना कहना

विरासत में यही संस्कार

 हर नारी को मिलना .............

पर क्यूँ अब भी

चुप रह कर सहना

एक हो अब सब

आवाज़ बुलंद है करना

 सशक्त इरादें पहले ही है इतना

 बस  संकोच को

दरकिनार है करना

अब ना किसी से

डरना न दबना

सोच समाज की है बदलना ..............




Sunday, 9 March 2014

होली रे ..मैं तुम संग होली















लो जी तुम संग मैं  हो ली रे
खूब लगाओ रंग और रोली रे
यूँ ना खेलो पानी के संग तुम
भीग गई लहंगा चोली रे .....

खूब हुई रंगों संग होली रे
रंगों से सजे हमजोली रे
यूँ न खाओ पान और भंग तुम
खेलो प्यार से ,न करो नशीली रे....

याद है न बरसाने की होली रे
कान्हा ने राधा संग खेली रे
यूँ न मारो पिचकारी की धार तुम
रंगों ,न अपने रंग,नही मैं भोली रे  .....

देखो चुनरी मेरी हुई गीली रे
रंगों से रंगी मैं  हुई रंगीली रे
नाच उठे सारे के सारे हम तुम
कितनी सुन्दर रंगों की बोली रे  .....
***नीता परिहार ***






















Wednesday, 5 March 2014

अब तुम सिर्फ जिंदगी के हिस्से रह गये
जाने अनजाने बातों के किस्से रह गये
यूँ तो दर्द तुमने  मुझे बेशुमार दिए
जब जब कुरेदा घाव रिसते रह गये

बादलों से छनकर धूप खिल आई है
मानो चाँद से चुपके से मिल आई है
यूँ तो बादलों ने डाला अपना डेरा है
तभी तो मौसन इतना हरजाई है





Sunday, 2 March 2014

बिटिया की आकांक्षा














फागुन मे संग प्रिय के
मैं ब्याह रचाऊँगी
मेहँदी हजारी हाथो में                                                                
तेरे नाम की सजाउंगी                                      
                             
अब ना करना
तुम कोई बहाना
मिल ही गये पिया
तुम संग प्रीत लगाउंगी

ढोल नगाड़े संग बाराती
द्वार मेरे आना
झूमकर प्यार में
मैं मंगलगीत गाऊँगी

सपने सतरंगी लिए
लाल चुनरिया  उढ़ाना
व्दार तेरे मैं
बनकर मैं मीत आउंगी

रहोगे हरदम संग मेरे
वादा एक निभाना
जन्मों तक यूँ ही
तुम संग रीत निभाउंगी

***नीता परिहार ***
2 MARCH 2014






Wednesday, 26 February 2014

दिल से

बात कह कर दिल हल्का किया जाए 
जख्म अपने दिल का चुपके से सिया जाए 
मामला दिल का है नाज़ुक बहुत 
छोटी से जिंदगी मस्ती से जिया जाए 
****नीता परिहार ****

Saturday, 22 February 2014

वक्त

वक्त पर कब चलता किसी का जोर है
हर जगह  चिल्लम चिली और शोर है
हम तो गुज़र कर रहे वक्त के साथ
यह भी वक्त का गुज़रता एक दौर है

***नीता परिहार ***



Monday, 17 February 2014

लज्ज़ा






हर नारी को
विरासत में मिली ........

लज्जा नारी का है गहना

चुप रहकर सब कुछ सहना
जैसे धरा बन धीर रखना

हमेशा तुम सादगी में रहना
जैसे पुरवाई का बहना

मुस्काते हुए अपनी बात कहना
जैसे कोयल का कूकना

पर अब आवाज़ है उठाना
जैसे पहाड़ों से नदी का झरना

सशक्त हो तुम ,अब न डरना
जैसे काँटों में फूलों का खिलना

संकोच में  घुट घुट कर न मरना
जैसे दिए की जोत ,बन जलना

सोच समाज की है बदलना
जिंदगी जिन्दादिली से जीना

****नीता परिहार ****

17 /2 /2014






Wednesday, 1 January 2014

नव दिन

















दूर गगन से रात एक संदेशा आया
नव-दिन की नयी सौगात लाया
चमका चमन नव किरणों से जगमग
 प्रकृति ने अभिवादन गीत गाया .............:)

**नीता परिहार **