फागुन मे संग प्रिय के
मैं ब्याह रचाऊँगी
मेहँदी हजारी हाथो में
तेरे नाम की सजाउंगी
अब ना करना
तुम कोई बहाना
मिल ही गये पिया
तुम संग प्रीत लगाउंगी
ढोल नगाड़े संग बाराती
द्वार मेरे आना
झूमकर प्यार में
मैं मंगलगीत गाऊँगी
सपने सतरंगी लिए
लाल चुनरिया उढ़ाना
व्दार तेरे मैं
बनकर मैं मीत आउंगी
रहोगे हरदम संग मेरे
वादा एक निभाना
जन्मों तक यूँ ही
तुम संग रीत निभाउंगी
***नीता परिहार ***
2 MARCH 2014

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