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Friday, 25 July 2014

"तांका"



 मैं कुछ कहूँ
 सुन तो रहे हो न
 न कहना कि
 मैंने बताया नही
 बात जो सुनाना था !!


आया सावन
मन भायी सखियाँ
पड़ीं फुहारें
चलें झूला झूलने
आओ सखियाँ।

@नीता परिहार


Sunday, 20 July 2014

वो बारिश के दिन














 ये बरिश की बूंदें जब भी
 बरसती  है ......
 ये आँखे इंतज़ार में तेरे 
 तरसती है ...........
 मन के आंगन में साथ
 अपने यादों के मोती
 लिए आती है ..........
 अश्क जब कोरों में 
 बूंद बन झिलमिलाते है 
 विरह में तेरे जिन्दगी 
 जीने को मजबूर 
 हुए जाती है .........
 ये गुजारिश है तुमसे 
 अबकी जब तुम जाना 
 संग अपने ये 
 सिली यादें भी ले जाना 
 ले जाना वे सपने भी
 जिन्हें देख अब भी अँखियाँ 
 लरजती है  ........
 *****नीता परिहार***** 








मंजिल















 पगडण्डी से होते हुए
 पहुंचकर चौराहे पर
 मंजिल दूर ही सही
 भटक न जाना तुम
 राह में कहीं डर कर
 अटक न जाना तुम
 कटीली ,पथरीली
 राहों पर चलकर
 मंजिल को पा ही
 जाना तुम .....

*****नीता परिहार *****









Friday, 18 July 2014

गजल

नीला नीला अम्बर हो जब
धीरे धीरे तब आया कर

आउंगा रातों में मिलने
कह कर तू ये मत जाया कर

यादों से तेरी जिन्दा हूँ
यादों में तू आ जाया कर

वादा करके मत भूला कर
अक्सर मुझको याद किया कर

ऐसा होता तो वो होता
मुझको तू मत बहलाया कर

*****नीता परिहार *****


Thursday, 17 July 2014

हायकू

आया सावन
रिमझिम फुहारें
गाएंगे हम

कोयल संग
कज़रियाँ प्यारी
नाचेंगे मोर

भीगेंगे हम
खाएंगे पकौड़े भी
चाय के संग

झूमे किसान
भर गए है खेत
रोपेंगे बीज

*****नीता परिहार *****

Tuesday, 15 July 2014

सावन आयो




















वसुंधरा इतने दिवस  से धरे हुए थी धीर
बादल,बरसे खोल दिल होकर आज अधीर.. 

 रुत भी गाने लगी राग हुआ मल्लार 
 खिल उठी साँझ है बहने लगी समीर 

 कोकिल स्वर गूंज रहे ,मेघ गरजे आज 
मन ख़ुशी से झूम उठा करे मयूर पुकार 

धरती ने पायी हरियाली ,पोखे भरे नीर 
सावन की बौछार से भर गए नदिया तीर