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Wednesday, 26 February 2014

दिल से

बात कह कर दिल हल्का किया जाए 
जख्म अपने दिल का चुपके से सिया जाए 
मामला दिल का है नाज़ुक बहुत 
छोटी से जिंदगी मस्ती से जिया जाए 
****नीता परिहार ****

Saturday, 22 February 2014

वक्त

वक्त पर कब चलता किसी का जोर है
हर जगह  चिल्लम चिली और शोर है
हम तो गुज़र कर रहे वक्त के साथ
यह भी वक्त का गुज़रता एक दौर है

***नीता परिहार ***



Monday, 17 February 2014

लज्ज़ा






हर नारी को
विरासत में मिली ........

लज्जा नारी का है गहना

चुप रहकर सब कुछ सहना
जैसे धरा बन धीर रखना

हमेशा तुम सादगी में रहना
जैसे पुरवाई का बहना

मुस्काते हुए अपनी बात कहना
जैसे कोयल का कूकना

पर अब आवाज़ है उठाना
जैसे पहाड़ों से नदी का झरना

सशक्त हो तुम ,अब न डरना
जैसे काँटों में फूलों का खिलना

संकोच में  घुट घुट कर न मरना
जैसे दिए की जोत ,बन जलना

सोच समाज की है बदलना
जिंदगी जिन्दादिली से जीना

****नीता परिहार ****

17 /2 /2014