आज फिर दिल किया
अतीत के गलियारे से
होते हुए घर के उस आंगन तक पहुंची
जहाँ मुख्य द्वार तक जाने है रास्ता
दोनों ओर बनी है बड़ी बड़ी क्यारियाँ
जहाँ रोपे है फूलों के कुछ बीज नये
गुलदावदी ,पीली ,सफेद ,मेंहरुन
भीनी भीनी महक लिए खिली है बेसुमार
गेंदे के फूलों की जैसे लगी है भरमार
डहलिया ,और गुलाब की आई है बहार
सूरजमुखी तो जैसे इंतज़ार है नवदिन का
माँ की आवाज़ सुन गलियारे से बाहर आई
बड़ा ही दुखद रहा जाना वहां
आज जब रूककर देखती हूँ
तो कुछ भी नही रहा यहाँ
आँगन तो अब रहा नही
बड़ा सा पक्का मकान बन गया
घर में रहने के लिए अब नही कोई
संयुक्त परिवार एकल हो गया
और हम सब हो गये अकेले .............नीता
अतीत के गलियारे से
होते हुए घर के उस आंगन तक पहुंची
जहाँ मुख्य द्वार तक जाने है रास्ता
दोनों ओर बनी है बड़ी बड़ी क्यारियाँ
जहाँ रोपे है फूलों के कुछ बीज नये
गुलदावदी ,पीली ,सफेद ,मेंहरुन
भीनी भीनी महक लिए खिली है बेसुमार
गेंदे के फूलों की जैसे लगी है भरमार
डहलिया ,और गुलाब की आई है बहार
सूरजमुखी तो जैसे इंतज़ार है नवदिन का
माँ की आवाज़ सुन गलियारे से बाहर आई
बड़ा ही दुखद रहा जाना वहां
आज जब रूककर देखती हूँ
तो कुछ भी नही रहा यहाँ
आँगन तो अब रहा नही
बड़ा सा पक्का मकान बन गया
घर में रहने के लिए अब नही कोई
संयुक्त परिवार एकल हो गया
और हम सब हो गये अकेले .............नीता




