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Monday, 30 September 2013

ख़्वाब













रात नींद न आई और चैन गया
जाने क्यूँ तेरा ही ख्याल आ गया

आँख लगी जब तो हमने ये देखा
जाने कैसे तेरा ही ख्वाब आ गया .....    *.नीता परिहार *


Wednesday, 25 September 2013

कहाँ हो तुम















लहलहाते खेतों ने 

कल कल करती नदियों ने 

कलरव करते  पक्षियों ने 

गुंजन करते भौरों ने 

खिलखिलाते फूलों ने 

मदहोश होती हवाओं ने 

गरजते मेघों ने 

रिमझिम करती बरखा ने 

हवा में महकी खुशबू ने 

और 

मस्त मौसम ने कहा

कहाँ कहाँ ना ढूंडा तुम्हे 

कहाँ हो ,कहाँ हो ,कहाँ हो 

तुम ...........:) *नीता परिहार *