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Wednesday, 25 March 2015

मुक्तक

चार कदम इनकी ओर बढ़ा कर तो देखो
एक नजर इनकी ओर उठा कर तो देखो
खिल जायेगी इनकी जिंदगी  फूलों सी
एक बार इनको गले से लगा कर तो देखो 

Sunday, 15 March 2015

रंग बदलते रिश्ते






















रिश्तों को महकते देखा है, हर रंग घुमड़ते देखा है. दिल में रहता था प्यार कभी, नफ़रत में बदलते देखा है. ऊंचे ऊंचे कद वालों का, ईमान भी गिरते देखा है महफ़िल में भी अक्सर उनको, तन्हा ही तड़पते देखा है. मुस्कान लबों पे आई तो, रूहों को मचलते देखा है. जब जब मैं घिरी हूँ मुश्किल में, अपनों को हँसते देखा है. क्या बात करें दुनिया की अब, तुमको को भी बदलते देखा है कुछ देर तलक वो साथ चले, फिर उनको बिछड़ते देखा है

*****नीता परीहार *****

Thursday, 12 March 2015

तन्हाई


हम तुम से रूठे रहे
यूँ  तुम अब  मनाने से रहे

रात गुजारी राह में तेरी
घर तुम अब आने से रहे

रात कट गई आंसू बहते रहे
तुम हमें अब बहलाने से रहे

चले जाओ  दूर चाहे तुम
हम तुम्हे अब  भुलाने से रहे

चाहे लगाओ  गुहार कितना
 हम दिल अब लगाने से रहे
*****नीता परिहार *****

Wednesday, 11 March 2015

बेबसी

मेरे लिए तुम्हारा
बेख्याली , बेगानगी (indifference)
बेपरवाह ,बेज़ार
होना पसंद आया
मुझे। ……
बदले में यही सब
बेहिसाब दूंगी तुम्हे
महसूस करोगे
उस  दिन
मुझे। .............
बेइख्तियार हो के (असहाय)
रहेगा दिल तुम्हारा
बेकरार होकर
मिलने आओगे
मुझे। ………
 बेगुनाह ,बेकसूर
थी  मैं ,किस
बात की बेरुखी दी
मुझे। …………
अब बेखुदी में (senselessness )
जियो तुम
भुला कर
मुझे। ……
भूली बिसरी यादों में
एक घडी बेख्वाबी की (sleeplessness )
देखना तुम
मुझे……।
हाँ फिर भी कहूँगी
बेपनाह (extreme )मोहब्बत है
 मुझे। ……।
*****नीता परिहार *****






Tuesday, 10 March 2015

मुक्तक


















आगे आगे राधा चली पीछे चले कान्हा,
बोली राधा कान्हा,मेरे पीछे नही आना
कान्हा बोले ,हंस कर मैं जाऊँगा कहाँ ?
दिल में मेरे बसी हो तुम कहीं नही जाना।।
*****नीता परिहार *****

"विडालगति छंद"




कान्हा तू काहे चोरी चोरी हांडी फोड़े,काहे माँ के पीछे से झांके जाए
झांके जाये राधा को तू क्यों कान्हा जोरा जोरी से पीछे पीछे काहे  जाए
पीछे पीछे काहे जाए कान्हा के साथी ग्वाला  राधा रानी झूला झूले जाए
राधा रानी झूला झूले कान्हा  यूँ ही झूला झूलाये आँखों में देखा जाए


Tuesday, 3 March 2015

होली

















होली आई तो सखी … गाल हो गये लाल 
आज खूब  हो रही ….... मस्ती और धमाल 
मस्ती और धमाल …भांग की खाई गुझिया 
गुल है सारे फ्यूज़ …गोल लगती है दुनियां 
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बात बात में हो रही ....रंगों भरी ठिठोली 
बिन पिचकारी खेलती …शब्दों के संग होली 
शब्दों के संग होली …याद है सब ऐसे ही 
खेली थी उस साल सदा खेलूं वैसे ही ...
*****नीता परिहार *****:)