Text selection Lock by Hindi Blog Tips

Saturday, 26 April 2014

नारी
















नारी तुम सदैव ही
               देश का स्वाभिमान हो
चिर प्राचीर वर्षों से
               देश का अभिमान हो
गाड़े है तुमने झंडे अनेक
               वीरता की तुम शान हो
मातृत्व को गले लगाया (मदर टेरेसा )
               भारत माँ की आन हो
बनी तुम दुर्गावती,लक्ष्मीबाई
              तत्पर जान देने कुर्बान हो
गिरिजा देवी,बेगम अख्तर,लता
              ठुमरी,दादरा,गजल गीतों की तान हो
इंदिरा,कल्पना,किरण बन नेतृत्व किया
             तुम ही तो देश की शान हो
उषा,शान्ति तिग्गा हो या बचेन्द्रिपाल
              तुम सब गुणों की खान हो
बहती तुम अविरल,निश्छल नदियों सी
              सहजता ही तुम्हारी पहचान हो
भ्रूण हत्या, दहेज़ प्रताड़ना,अनाचार
             न अब तुम्हारा अपमान हो
बिखेरे है सब रंग तुम्हीं ने
             नारी तुम महान हो
             नारी तुम महान हो .
       
*****नीता परिहार *****


         

Friday, 25 April 2014

तुम जो मिली





















तुम जो मिली हो तो
निगाहों में बस गई हो

अब  हम सफर हो तो
नजारों  में बस गई हो

शाम ढल गई हो तो
सितारों में बस गई हो

सुबह जब हो तो
बहारों में बस गई हो...............

 *****नीता परिहार *****




इबादत

















हाथ उठाकर जब भी करता है इबादत
इबादत नही हरदम करता है शिकायत
रख भरोसा मुझ पर तू इतना
करता हूँ हरपाल तेरी हिफाजत .........

             *****नीता परहार*****

Saturday, 19 April 2014

जुदाई

















जब दिल से दिल की  बात चली
रोते रोते ................रात कटी

जब एक शाम याद की बात चली
कहते कहते .............रात कटी

जब उस जुल्म की बात चली
जगते जगते............रात कटी

 जब उनसे दूर जाने की बात चली
 तनहा तनहा  ...............रात कटी

जब उनसे जुदाई की बात चली
आँखों आँखों में ..........रात कटी
*****नीता परिहार *****









नज़्म



















बहुत हंसा हम पर जमाने ने
थोडा साथ तेरे हंसने हंसाने में

मिला हमें जो हमने चाहा न था
बीत गई उम्र रिश्ते निभाने में

किया करता था तू कभी वफ़ा की बातें
आज मजे ले रहा हमें जलाने में

तेरे इक आहट पाने के लिए
इंतज़ार था हमें एक जमाने में

जुदाई तो प्यार का  किस्सा  है
भरोसा है हमें तकदीर के मिलाने में


***नीता परिहार ***


दर्द






















दर्द जुदाई का मुझसे सहा जाता नही
टूटकर अब तुझे मनाना चाहती हूँ

 अब दे भी दो  सहारा मुझे तुम
 सर काँधे पर रख रोना चाहती हूँ

कर भी ले कुछ प्यार की बातें घडी भर
दर्द दिल का मैं सुनाना... चाहती हूँ

अश्क बन आँखों में बस ही गये तुम
क्यूँ मैं इनको अब बहाना चाहती  हूँ

कर भी ले अब प्यार की बाते दो घड़ी
दिल में बस एक कोना चाहती  हूँ

          ***नीता परिहार ***


Monday, 14 April 2014

इंतज़ार है मुझे















इंतज़ार है मुझे
तेरे आने का

खुशियों से कलियों
के चटक जाने का

खिल कर फूलों के
गुलशन में बिछ जाने का

खुशबू से मन के
महक जाने का

महक से ,तेरे
बहक के आने का

ले के खुदा का नूर
वो बसंत के आने का

क्या करोगे अब
अपने बहानों का

क्या वजह कहोगे
खिंच कर चले आने का ..........हम्म

****नीता परिहार ****

Monday, 7 April 2014

राजनीति

राजनीति गर्म मौसम में बड़ी गरमाई है
बेशर्म नेताओं से आज शर्म भी शरमाई है

तोड़ दिए भ्रष्टाचार के रिकार्ड सारे के सारे
 राजनीति भ्रस्ट नेताओं सेजो भरमाई है

लाचार और बेबस है सी ताक रही जनता
उनकी जान पर बन आई ये महंगाई है

मारा है बेरोज़गारी ने नवयुवको को
उम्मीद ही जगह ,आँखों में बेबसी छाई है

जागो विवेक से लो काम जब जागे तब सवेरा
वोट दो हर कोई परिवर्तन की लहर आई है



सपना


















देखा था हमने  हंसी सा एक सपना
जो हरदम  लगा था कुछ अपना

कोशिशे की हज़ार संभालने की
पर मजबूरियां थी बड़ी पड़ा खोना

बिखर जाते है खुली आँखों के सपने
लिखा हो गर किस्मत में रोना

रास्ता अब चुन लिया है हमने
मंजिले है अब मेरी खुशिया पाना