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Friday, 25 April 2014

तुम जो मिली





















तुम जो मिली हो तो
निगाहों में बस गई हो

अब  हम सफर हो तो
नजारों  में बस गई हो

शाम ढल गई हो तो
सितारों में बस गई हो

सुबह जब हो तो
बहारों में बस गई हो...............

 *****नीता परिहार *****




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