हौसलों की उड़ान
Monday, 7 April 2014
सपना
देखा था हमने हंसी सा एक सपना
जो हरदम लगा था कुछ अपना
कोशिशे की हज़ार संभालने की
पर मजबूरियां थी बड़ी पड़ा खोना
बिखर जाते है खुली आँखों के सपने
लिखा हो गर किस्मत में रोना
रास्ता अब चुन लिया है हमने
मंजिले है अब मेरी खुशिया पाना
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