इंतज़ार है मुझे
तेरे आने का
खुशियों से कलियों
के चटक जाने का
खिल कर फूलों के
गुलशन में बिछ जाने का
खुशबू से मन के
महक जाने का
महक से ,तेरे
बहक के आने का
ले के खुदा का नूर
वो बसंत के आने का
क्या करोगे अब
अपने बहानों का
क्या वजह कहोगे
खिंच कर चले आने का ..........हम्म
****नीता परिहार ****
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