बहुत हंसा हम पर जमाने ने
थोडा साथ तेरे हंसने हंसाने में
मिला हमें जो हमने चाहा न था
बीत गई उम्र रिश्ते निभाने में
किया करता था तू कभी वफ़ा की बातें
आज मजे ले रहा हमें जलाने में
तेरे इक आहट पाने के लिए
इंतज़ार था हमें एक जमाने में
जुदाई तो प्यार का किस्सा है
भरोसा है हमें तकदीर के मिलाने में
***नीता परिहार ***

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