सुरमई शाम से आज
ना जाने क्यूं घबराता है
ये दिल
ना जाने क्यूं यादों में
तेरी तडपाता है
ये दिल
जब भी आँखों में नींद
नही होती रातों में
तेरी ही यादों में भटकाता है
ये दिल
तू दूर ही सही
पर है तो मेरा
जिसे देख खुश हो जाता है
ये दिल
पाकर तुझे सामने
झूमकर गाता है
ये दिल
जाने क्या ऐसा है तुझमे
तुझे पा कर इतराता है
ये दिल ...
*नीता परिहार *
तेरी तडपाता है
ये दिल
जब भी आँखों में नींद
नही होती रातों में
तेरी ही यादों में भटकाता है
ये दिल
तू दूर ही सही
पर है तो मेरा
जिसे देख खुश हो जाता है
ये दिल
पाकर तुझे सामने
झूमकर गाता है
ये दिल
जाने क्या ऐसा है तुझमे
तुझे पा कर इतराता है
ये दिल ...
*नीता परिहार *
