हौसलों की उड़ान
Tuesday, 9 October 2012
अमृत कलश
बचपन की पुरवैया बीती
तरुणाई लेती अंगड़ाई
पलक पाँवड़े रही बिछाई
दूर कहीं गूंजी शहनाई
आशाओं ने करवट बदली
आशीषों का लगा मुहूरत
जीवन जैसे .....
अमृत कलश हो गया ....
*नीता परिहार *
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