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Sunday, 23 November 2014

तुम















ख़्वाबों में मिली
एक परी थी
पूरी हो यही
कामना थी
यश से भरी
झोली थी
बिंदिया थी
चूडियाँ थी
पायल थी
चांदनी रात थी
ओस थी,आस थी
इंतज़ार में तेरे
साँस थी
आँखों में
नमी थी
बस एक तेरी
कमी थी
सौगात में मिल
जाओ मुझे "तुम"
ऐसी एक प्यास थी !!
*****नीता परिहार ****

Saturday, 8 November 2014

गजल


झूठ सुना कर मत उलझा कर
बेहतर  है तू सच बोला कर

दिल की बात रहे अब दिल में
राज़ दिलों के मत खोला कर

दुनिया में है और बहुत कुछ
दिल से तू बाहर निकला कर

खुशियाँ बाँट नही सकता गर
बीज न नफरत के बोया कर

दिल का हाल सुनाऊं कैसे
दिल से दिल बहलाया कर !!

*****नीता परिहार *****






Friday, 7 November 2014

हायकू

खिलती सांझ
डूब गया सूरज
निकला चाँद

हर्षित मन
बावला हुआ जाए
उड़ता फिरे

जी हुआ जाए
शायराना सा मेरा
तन्हाई गाये

 डूबा डूबा सा
 दिल हुआ जाता है
 याद सताये !!

नीता परिहार



Sunday, 2 November 2014

माँ



दिन-रात परवरिश,

करने वाली *माँ*

कहाँ वह अपनी,

देखभाल  कर पाती है /

इंतज़ार में बच्चों के,

आँखे पथरा जाती है/

सुन कोई एक आवाज़,

दौड़ दरवाज़े तक आती है/

देतीं है दुआएं हर-पल ,

खुश है बच्चे सोच ,

आत्म संतुष्टी पाती है /

कर स्रष्टि का सृजन

संसार की भीड़ में वो

खुद को अकेला पाती है!!

*****नीता परिहार *****