Sunday, 13 January 2013
Thursday, 10 January 2013
सपने
आओ छत पर जाएँ
चलो एक चाँद खिलाएं /
सपनों के कुछ महल बनाएं
अपना कुछ मन बहलायें /
चलो चाँद पर झूला बनाएं
प्यार भरे कुछ पल बिताएं /
कुछ किस्से हम सुनाएँ
कुछ किस्से तुम सुनाओ /
चलो कुछ गीत हम बनाएं
कुछ गीत तुम गुनगुनाओ /
रात के आसमां पर
तारों की बारात सजाएँ /
चलो चाँद को दूल्हा बनायें
और भोर को दुल्हन ...............!!.....:)
*नीता परिहार *
Wednesday, 2 January 2013
प्रकृति
सुबह सवेरे आँख
खुली तो देखा
आहा ,प्रकृति ने
कितनी सुन्दर
छटा है बिखेरी
अनुपम है जिसकी आभा
विस्मित उसकी रंगत
छटा है बिखेरी
अनुपम है जिसकी आभा
विस्मित उसकी रंगत
ओढ़ कोहरे की चुनरिया ..
बदलो की ओट से
निहारता सूरज,जिसका
कुदरती केसरिया रंग
कुदरती केसरिया रंग
जगत में महकते मुस्काते,
मनमोहक फूलों से सजी महफ़िल
मनमोहक फूलों से सजी महफ़िल
रंगबिरंगी तितलियाँ
गुंजन करते भँवरे ...
ठंडक लिए मौसम
साथ में,
गरम चाय का प्याला
और तुम .........
**नीता परिहार **
दामिनी
रात बीती ,बात बीती
फिर बीता एक साल
तुम जिओगी ....
हर घर में
दिल में लिए सवाल
अपनी लड़ाई
खुद लड़नी है
करनी है खुद ही
अपनी देख-भाल
बात बात पर
चलते है वो
वो सियासी चाल
ना करो कोई अपेक्षा
ना करो उम्मीद
बहुत हो चूका
अब ना सहेंगे
कर हौसलों को
बुलंद इतना
की खुदा भी आकर
पूछे की बता तेरी
रज़ा क्या है ......
*नीता परिहार *
फिर बीता एक साल
तुम जिओगी ....
हर घर में
दिल में लिए सवाल
अपनी लड़ाई
खुद लड़नी है
करनी है खुद ही
अपनी देख-भाल
बात बात पर
चलते है वो
वो सियासी चाल
ना करो कोई अपेक्षा
ना करो उम्मीद
बहुत हो चूका
अब ना सहेंगे
कर हौसलों को
बुलंद इतना
की खुदा भी आकर
पूछे की बता तेरी
रज़ा क्या है ......
*नीता परिहार *
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