सुबह सवेरे आँख
खुली तो देखा
आहा ,प्रकृति ने
कितनी सुन्दर
छटा है बिखेरी
अनुपम है जिसकी आभा
विस्मित उसकी रंगत
छटा है बिखेरी
अनुपम है जिसकी आभा
विस्मित उसकी रंगत
ओढ़ कोहरे की चुनरिया ..
बदलो की ओट से
निहारता सूरज,जिसका
कुदरती केसरिया रंग
कुदरती केसरिया रंग
जगत में महकते मुस्काते,
मनमोहक फूलों से सजी महफ़िल
मनमोहक फूलों से सजी महफ़िल
रंगबिरंगी तितलियाँ
गुंजन करते भँवरे ...
ठंडक लिए मौसम
साथ में,
गरम चाय का प्याला
और तुम .........
**नीता परिहार **

वाह, ठंडक लिए मौसम
ReplyDeleteसाथ मे गरम चाय का प्याला
और
तुम...., आनंद आगया,
गरम चाय पीकर आनंद आया ना दी ...:)
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