आओ छत पर जाएँ
चलो एक चाँद खिलाएं /
सपनों के कुछ महल बनाएं
अपना कुछ मन बहलायें /
चलो चाँद पर झूला बनाएं
प्यार भरे कुछ पल बिताएं /
कुछ किस्से हम सुनाएँ
कुछ किस्से तुम सुनाओ /
चलो कुछ गीत हम बनाएं
कुछ गीत तुम गुनगुनाओ /
रात के आसमां पर
तारों की बारात सजाएँ /
चलो चाँद को दूल्हा बनायें
और भोर को दुल्हन ...............!!.....:)
*नीता परिहार *
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