किसान
सूखे है खेत
कीचड़ हुआ
खेत जोते किसान
रोपे है बीज
फसल उगी
लहलहाए खेत
खिला चेहरा
दौड़ते बैल
गले में है घंटियाँ
आई खुशियाँ
सूखे है खेत
बंज़र है जमीन
बहते आंसू
खेत जोतता
थक गया किसान
चारा न पानी
क़र्ज़ में डूबा
बंधाई थी उम्मीद
वादा मुकरा
ये न करना
ख़ुदकुशी है पाप
हौसला रख
जागो किसान
लड़ो हक के लिए
बदलो सोच
हौसला रख
जागो किसान
लड़ो हक के लिए
बदलो सोच
घिरे बादल
हरसाई जमीन
आई बारिश
कीचड़ हुआ
खेत जोते किसान
रोपे है बीज
फसल उगी
लहलहाए खेत
खिला चेहरा
दौड़ते बैल
गले में है घंटियाँ
आई खुशियाँ
हुआ विकास
किसान खुशहाल
किसान खुशहाल
देश समृद्ध ............
***नीता परिहार ***
***नीता परिहार ***


