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Sunday, 23 March 2014

चंद हायकू

किसान















सूखे है खेत
बंज़र है जमीन 
बहते आंसू 

खेत जोतता 
थक गया किसान 
चारा न पानी

क़र्ज़ में डूबा 
बंधाई थी उम्मीद 
वादा मुकरा 

ये न करना 
ख़ुदकुशी है पाप
हौसला रख

जागो किसान
लड़ो हक के लिए
बदलो सोच 

घिरे बादल 
हरसाई जमीन 
आई बारिश 

कीचड़ हुआ
खेत जोते किसान
रोपे  है बीज

फसल उगी
लहलहाए खेत
खिला चेहरा

दौड़ते बैल
गले में है घंटियाँ
आई खुशियाँ

हुआ विकास
किसान खुशहाल
देश समृद्ध ............
***नीता परिहार ***






Monday, 10 March 2014

लज्जा


बचपन से यही है जाना

हया  है नारी का गहना

मुश्किल घडी  में भी

 हर बात है सहना

चुप ही रह जन्मों तक

 संग है रहना

चाहे जो भी हो कभी

कुछ ना कहना

विरासत में यही संस्कार

 हर नारी को मिलना .............

पर क्यूँ अब भी

चुप रह कर सहना

एक हो अब सब

आवाज़ बुलंद है करना

 सशक्त इरादें पहले ही है इतना

 बस  संकोच को

दरकिनार है करना

अब ना किसी से

डरना न दबना

सोच समाज की है बदलना ..............




Sunday, 9 March 2014

होली रे ..मैं तुम संग होली















लो जी तुम संग मैं  हो ली रे
खूब लगाओ रंग और रोली रे
यूँ ना खेलो पानी के संग तुम
भीग गई लहंगा चोली रे .....

खूब हुई रंगों संग होली रे
रंगों से सजे हमजोली रे
यूँ न खाओ पान और भंग तुम
खेलो प्यार से ,न करो नशीली रे....

याद है न बरसाने की होली रे
कान्हा ने राधा संग खेली रे
यूँ न मारो पिचकारी की धार तुम
रंगों ,न अपने रंग,नही मैं भोली रे  .....

देखो चुनरी मेरी हुई गीली रे
रंगों से रंगी मैं  हुई रंगीली रे
नाच उठे सारे के सारे हम तुम
कितनी सुन्दर रंगों की बोली रे  .....
***नीता परिहार ***






















Wednesday, 5 March 2014

अब तुम सिर्फ जिंदगी के हिस्से रह गये
जाने अनजाने बातों के किस्से रह गये
यूँ तो दर्द तुमने  मुझे बेशुमार दिए
जब जब कुरेदा घाव रिसते रह गये

बादलों से छनकर धूप खिल आई है
मानो चाँद से चुपके से मिल आई है
यूँ तो बादलों ने डाला अपना डेरा है
तभी तो मौसन इतना हरजाई है





Sunday, 2 March 2014

बिटिया की आकांक्षा














फागुन मे संग प्रिय के
मैं ब्याह रचाऊँगी
मेहँदी हजारी हाथो में                                                                
तेरे नाम की सजाउंगी                                      
                             
अब ना करना
तुम कोई बहाना
मिल ही गये पिया
तुम संग प्रीत लगाउंगी

ढोल नगाड़े संग बाराती
द्वार मेरे आना
झूमकर प्यार में
मैं मंगलगीत गाऊँगी

सपने सतरंगी लिए
लाल चुनरिया  उढ़ाना
व्दार तेरे मैं
बनकर मैं मीत आउंगी

रहोगे हरदम संग मेरे
वादा एक निभाना
जन्मों तक यूँ ही
तुम संग रीत निभाउंगी

***नीता परिहार ***
2 MARCH 2014