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Sunday, 9 March 2014

होली रे ..मैं तुम संग होली















लो जी तुम संग मैं  हो ली रे
खूब लगाओ रंग और रोली रे
यूँ ना खेलो पानी के संग तुम
भीग गई लहंगा चोली रे .....

खूब हुई रंगों संग होली रे
रंगों से सजे हमजोली रे
यूँ न खाओ पान और भंग तुम
खेलो प्यार से ,न करो नशीली रे....

याद है न बरसाने की होली रे
कान्हा ने राधा संग खेली रे
यूँ न मारो पिचकारी की धार तुम
रंगों ,न अपने रंग,नही मैं भोली रे  .....

देखो चुनरी मेरी हुई गीली रे
रंगों से रंगी मैं  हुई रंगीली रे
नाच उठे सारे के सारे हम तुम
कितनी सुन्दर रंगों की बोली रे  .....
***नीता परिहार ***






















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