अब तुम सिर्फ जिंदगी के हिस्से रह गये
जाने अनजाने बातों के किस्से रह गये
यूँ तो दर्द तुमने मुझे बेशुमार दिए
जब जब कुरेदा घाव रिसते रह गये
बादलों से छनकर धूप खिल आई है
मानो चाँद से चुपके से मिल आई है
यूँ तो बादलों ने डाला अपना डेरा है
तभी तो मौसन इतना हरजाई है
जाने अनजाने बातों के किस्से रह गये
यूँ तो दर्द तुमने मुझे बेशुमार दिए
जब जब कुरेदा घाव रिसते रह गये
बादलों से छनकर धूप खिल आई है
मानो चाँद से चुपके से मिल आई है
यूँ तो बादलों ने डाला अपना डेरा है
तभी तो मौसन इतना हरजाई है
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