बचपन से यही है जाना
हया है नारी का गहना
मुश्किल घडी में भी
हर बात है सहना
चुप ही रह जन्मों तक
संग है रहना
चाहे जो भी हो कभी
कुछ ना कहना
विरासत में यही संस्कार
हर नारी को मिलना .............
पर क्यूँ अब भी
चुप रह कर सहना
एक हो अब सब
आवाज़ बुलंद है करना
सशक्त इरादें पहले ही है इतना
बस संकोच को
दरकिनार है करना
अब ना किसी से
डरना न दबना
सोच समाज की है बदलना ..............
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