झूठ सुना कर मत उलझा कर
बेहतर है तू सच बोला कर
दिल की बात रहे अब दिल में
राज़ दिलों के मत खोला कर
दुनिया में है और बहुत कुछ
दिल से तू बाहर निकला कर
खुशियाँ बाँट नही सकता गर
बीज न नफरत के बोया कर
दिल का हाल सुनाऊं कैसे
दिल से दिल बहलाया कर !!
*****नीता परिहार *****
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