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Saturday, 8 November 2014

गजल


झूठ सुना कर मत उलझा कर
बेहतर  है तू सच बोला कर

दिल की बात रहे अब दिल में
राज़ दिलों के मत खोला कर

दुनिया में है और बहुत कुछ
दिल से तू बाहर निकला कर

खुशियाँ बाँट नही सकता गर
बीज न नफरत के बोया कर

दिल का हाल सुनाऊं कैसे
दिल से दिल बहलाया कर !!

*****नीता परिहार *****






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