दर्द जुदाई का मुझसे सहा जाता नही
टूटकर अब तुझे मनाना चाहती हूँ
अब दे भी दो सहारा मुझे तुम
सर काँधे पर रख रोना चाहती हूँ
कर भी ले कुछ प्यार की बातें घडी भर
दर्द दिल का मैं सुनाना... चाहती हूँ
अश्क बन आँखों में बस ही गये तुम
क्यूँ मैं इनको अब बहाना चाहती हूँ
कर भी ले अब प्यार की बाते दो घड़ी
दिल में बस एक कोना चाहती हूँ
***नीता परिहार ***

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