रिश्तों को महकते देखा है, हर रंग घुमड़ते देखा है. दिल में रहता था प्यार कभी, नफ़रत में बदलते देखा है. ऊंचे ऊंचे कद वालों का, ईमान भी गिरते देखा है महफ़िल में भी अक्सर उनको, तन्हा ही तड़पते देखा है. मुस्कान लबों पे आई तो, रूहों को मचलते देखा है. जब जब मैं घिरी हूँ मुश्किल में, अपनों को हँसते देखा है. क्या बात करें दुनिया की अब, तुमको को भी बदलते देखा है कुछ देर तलक वो साथ चले, फिर उनको बिछड़ते देखा है
*****नीता परीहार *****

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