लहलहाते खेतों ने
कल कल करती नदियों ने
कलरव करते पक्षियों ने
गुंजन करते भौरों ने
खिलखिलाते फूलों ने
मदहोश होती हवाओं ने
गरजते मेघों ने
रिमझिम करती बरखा ने
हवा में महकी खुशबू ने
और
मस्त मौसम ने कहा
कहाँ कहाँ ना ढूंडा तुम्हे
कहाँ हो ,कहाँ हो ,कहाँ हो
तुम ...........:) *नीता परिहार *
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