Text selection Lock by Hindi Blog Tips

Sunday, 10 November 2013

नसीब



















प्यार के ख़त उसे ही मैं लिखता गया
वक्त भी जैसे मानो थमता गया ..........

मैं सिसकता रहा आँख जब ये खुली
ख्वाब में रोज़ मैं तुमसे ही मिलता रहा

एक बुत को तराशा बहुत प्यार से
ख़ूबसूरत हो इतनी की तकता गया

चाह थी दिल में देखूं तुम्हे रात दिन
तुम मिली ना मैं दर दर भटकता रहा

था नसीबों में मेरे मिला वो मुझे
वो ही वो मेरे जीवन में बसता रहा...........*नीता परिहार *

No comments:

Post a Comment