हौसलों की उड़ान
Sunday, 20 July 2014
मंजिल
पगडण्डी से होते हुए
पहुंचकर चौराहे पर
मंजिल दूर ही सही
भटक न जाना तुम
राह में कहीं डर कर
अटक न जाना तुम
कटीली ,पथरीली
राहों पर चलकर
मंजिल को पा ही
जाना तुम .....
*****नीता परिहार *****
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