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Wednesday, 7 May 2014

तन्हाई
















ढल गया चाँद आज फिर तन्हा
दिल का टूटा है साज़ फिर तन्हा

कुछ भी बाकी रहा न कहने को
कैसे छुपता ये राज़ फिर तन्हा

चाँद तकता है आज फिर मुझको
क्यूँ मुझे हो न नाज़ फिर तन्हा

छीन कर चैन और दिल का सुकूँ
कर दिया मुझको आज फिर तन्हा

गीत कोई दिल से जब गाओगे
अब न होगी आवाज़ फिर तन्हा


*****नीता परिहार *****


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