याद आयेंगे अब पल गुजरते हुए
रात है महकी महकी हुई सी अभी
बिछ गये फूल राहों में झरते हुए
बह गई बूँदें पलकों पे ठहरी हुई
बारिशे हुई यूँ कुछ लरजते हुए
बहकी बहकी सी बातें हुई रात भर
सुबह भी हो गई फिर चहकते हुए
पी निगाहों से थोड़ी सी मय झूम के
घर चली आई नीता बहकते हुए ..............
*****नीता परिहार *****

No comments:
Post a Comment