Text selection Lock by Hindi Blog Tips

Wednesday, 29 October 2014

एक नदी ने कहा

     नदी ने कहा

कितनी,गहरी थी मैं !

मानव ने  संहार किया,

अब उथली हूँ मैं !

छेड़ा है तुमने मुझको ,

अब आक्रोश में रहती हूँ मैं !

शीतल झरने सी बहने वाली ,

अब सूख चली हूँ मैं !

चंचल सी कल कल करने वाली

जलजला मचा रही हूँ मैं !

और इंतज़ार अब न करवाना ,

रक्षक बनकर मेरे आना।

तुम मुझसे हो, तुमसे हूँ मैं



*****नीता परिहार *****












No comments:

Post a Comment