समझ नही आता
क्या संबोधन दूँ
सखा कहूँ या देवदूत
गुरुदेव कहूँ या देव
लेकर आये जीवन में मेरे
रोशनी की एक सुन्दर चादर
मुस्कराहट दी
और दी जीने की चाहत
गुज़र गये मौसम बुरे
और रोशनी ने आकार लिया
दी जीने की राह नयी
और जीवन से प्यार हुआ
दिया सुन्दर सा ध्येय मुझे
जिये अपने लिए तो
क्या जिये
दूसरों के लिए जिओ तो
तो कोई बात बने .....
*जय गुरुदेव *
*नीता परिहार *

सहज, सरल शब्द संयोजन, सुंदर भावपूर्ण प्रस्तुति, "दी जीने की वजह नई, और जीवन से प्यार हुआ, दी सुंदर सी सीख मुझे, जिये अपने लिए तो क्या जिये, दूसरों के लिए जिये तो कोई बात बने..." बहुत खूबसूरत॰
ReplyDeleteशुक्रिया दी .....मेरे प्यारे प्यारे गुरुदेव को समर्पित है चंद अहसास ....
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