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Sunday, 13 October 2013

स्मृतियाँ
















रात भर स्मृतियाँ  झरती रही

हरसिंगार के फूलों सी

डाल डाल पर फुदकता रहा

अहसास चिड़ियों सा

रात चांदनी सजती रही

नई नवेली दुल्हन सी

मन महकता रहा

फूलों की खुशबू सा

रात चांदनी चमकती रही

शबनम की बूंदों सी

दिल मचलता रहा

ख़्वाबों के पूरा होने

के हकीकत सा

हल्की से ठंडक लिए भोर

किरणें बिखेरती रही

मन बहकता रहा

ज़ज्बातों सा ..............नीता परिहार

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