ना जाने क्यू इस दिल ने कहा
जब जब हवा चलती है
जिन्दगी न जाने
कितनी करवटें
बदलती है
आँगन में गिरे सूखे पत्तों में
जब भी सरसराहट होती है
सीढ़ियों पर जब
चढ़ने की आहट
होती है .......
बरबस ही उस ओर
मन चला जाता है
जानती हूँ कोई
दिल में कोई आस नही
दरवाजे पर जब होती
खटखटाहट है,फिर भी
उम्मीद से दरवाजा खोलती हूँ
मायूसी ही हाथ होती है
जिन्दगी के ये
उतार चढ़ाव
कभी गम की सर्द हवा
देती है
तो कभी नर्म हवाएं
दोस्त भी बन जाती है
मौसम कभी ठहरता नही
आज पतझड़ है तो
कल बसंत भी आएगा.......
*नीता परिहार *
जब जब हवा चलती है
जिन्दगी न जाने
कितनी करवटें
बदलती है
आँगन में गिरे सूखे पत्तों में
जब भी सरसराहट होती है
सीढ़ियों पर जब
चढ़ने की आहट
होती है .......
बरबस ही उस ओर
मन चला जाता है
जानती हूँ कोई
दिल में कोई आस नही
दरवाजे पर जब होती
खटखटाहट है,फिर भी
उम्मीद से दरवाजा खोलती हूँ
मायूसी ही हाथ होती है
जिन्दगी के ये
उतार चढ़ाव
कभी गम की सर्द हवा
देती है
तो कभी नर्म हवाएं
दोस्त भी बन जाती है
मौसम कभी ठहरता नही
आज पतझड़ है तो
कल बसंत भी आएगा.......
*नीता परिहार *