मेरे घर आँगन आई जब बिटिया रानी
देखते ही जी किया ,नाम रख दूँ, चिनिया रानी !
वो सजाना संवारना ,काजल का टीका लगाना
गोदी के हिंडोले में झुलाकर सुलाना,
वो उंगुली पकड़कर चलना सिखाना!
घर के दरवाजे पर बैठ, वो इंतज़ार करवाना
पापा के साथ रोज़ शाम ,स्कूटर पर चक्कर लगाना!
वो पापा के पैरों पर खड़े हो झूला झुलाना,
मनगढ़ंत कहानी सुन सवालो का करना !
नर्सरी की कविताओ को तुतलाकर सुनाना
कॉलेज की बातों को घंटों फोन पर बताना !
दिनो को जैसे हवा के पंख लग जाना
कहीं से उसके सपनों के ,राजकुमार का आना !
ब्याह दे मुझ संग तेरी चिनिया रानी !
खुशियों से अँखियाँ भर आई
पर दिल ही दिल बहुत घबराई
कैसे रह पाऊँगी उसके बिन
पापा की दुलारी ,मेरी प्यारी बिटिया रानी
नाम रखा जिसका चिनिया रानी ....!!!
** नीता परिहार **
