रात बीती ,बात बीती
फिर बीता एक साल
तुम जिओगी ....
हर घर में
दिल में लिए सवाल
अपनी लड़ाई
खुद लड़नी है
करनी है खुद ही
अपनी देख-भाल
बात बात पर
चलते है वो
वो सियासी चाल
ना करो कोई अपेक्षा
ना करो उम्मीद
बहुत हो चूका
अब ना सहेंगे
कर हौसलों को
बुलंद इतना
की खुदा भी आकर
पूछे की बता तेरी
रज़ा क्या है ......
*नीता परिहार *
फिर बीता एक साल
तुम जिओगी ....
हर घर में
दिल में लिए सवाल
अपनी लड़ाई
खुद लड़नी है
करनी है खुद ही
अपनी देख-भाल
बात बात पर
चलते है वो
वो सियासी चाल
ना करो कोई अपेक्षा
ना करो उम्मीद
बहुत हो चूका
अब ना सहेंगे
कर हौसलों को
बुलंद इतना
की खुदा भी आकर
पूछे की बता तेरी
रज़ा क्या है ......
*नीता परिहार *