हर नारी को
विरासत में मिली ........
लज्जा नारी का है गहना
चुप रहकर सब कुछ सहना
जैसे धरा बन धीर रखना
हमेशा तुम सादगी में रहना
जैसे पुरवाई का बहना
मुस्काते हुए अपनी बात कहना
जैसे कोयल का कूकना
पर अब आवाज़ है उठाना
जैसे पहाड़ों से नदी का झरना
सशक्त हो तुम ,अब न डरना
जैसे काँटों में फूलों का खिलना
जैसे दिए की जोत ,बन जलना
सोच समाज की है बदलना
जिंदगी जिन्दादिली से जीना
****नीता परिहार ****