कड़ाके की ठण्ड में
सडको पर
सिग्नल पर
कार के पास दौडती
दो रोटी के लिए
हाथ फैलाती जिन्दगी
कभी रोती
कभी मुस्काती
गुनगुनी ताप लिए
कब नया दिन
निकलेगा।
***नीता परिहार ***
सडको पर
सिग्नल पर
कार के पास दौडती
दो रोटी के लिए
हाथ फैलाती जिन्दगी
कभी रोती
कभी मुस्काती
गुनगुनी ताप लिए
कब नया दिन
निकलेगा।
***नीता परिहार ***