होली आई तो सखी … गाल हो गये लाल
आज खूब हो रही ….... मस्ती और धमाल
मस्ती और धमाल …भांग की खाई गुझिया
गुल है सारे फ्यूज़ …गोल लगती है दुनियां
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बात बात में हो रही ....रंगों भरी ठिठोली
बिन पिचकारी खेलती …शब्दों के संग होली
शब्दों के संग होली …याद है सब ऐसे ही
खेली थी उस साल सदा खेलूं वैसे ही ...
*****नीता परिहार *****:)
