ये रूहों का ही तो बंधन है
जाने कितने जन्मों
से मिल रहे हम। ।
ऐसी क्या बात थी
चाहे भी तो जुदा
न हुए हम.।
मुश्किल थी बड़ी
बिछड़े थे जब
जमाने से हम। ।
न तुझको न मुझको
ही पता था
इस तरह मिलेंगे हम.।
वक्त का चक्र
तो चलता ही रहेगा
दो जिस्म
मगर एक जान
रहेंगे हम.…
जाने कितने जन्मों
से मिल रहे हम। ।
ऐसी क्या बात थी
चाहे भी तो जुदा
न हुए हम.।
मुश्किल थी बड़ी
बिछड़े थे जब
जमाने से हम। ।
न तुझको न मुझको
ही पता था
इस तरह मिलेंगे हम.।
वक्त का चक्र
तो चलता ही रहेगा
दो जिस्म
मगर एक जान
रहेंगे हम.…