तन्हाई में मुझे रोना आता बहुत है !
बगीयों में खिले फूलों सी ,खुश रहूँ
पर जमाना मुझ पर हंसता बहुत है !
इश्क ने मुझे कही का न छोड़ा ,
दर्द ने तेरे, मुझे तड़पाया बहुत है !
भूल भी गया गर ,तू गम नही ,
खुश रह तू सदा मेरी दुआ बहुत है !
हाले दिल ,अब क्या बयाँ करें
खुश रहना नीता को आता बहुत है !
*****नीता परिहार *****
