हाले दिल कुछ तुम कहो कुछ हम कहें
दर्द दिल का कुछ तुम सहो कुछ हम सहें।
गर हर जिद पर तुम अपनी ही अड़े रहे
दिल की न तुम सुन सको न कुछ हम सुन सके।।
*****नीता परिहार *****
दर्द दिल का कुछ तुम सहो कुछ हम सहें।
गर हर जिद पर तुम अपनी ही अड़े रहे
दिल की न तुम सुन सको न कुछ हम सुन सके।।
*****नीता परिहार *****