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Monday, 20 July 2015

उन्नति
















सुनो, तरक्की की राह
पर बढ़ते चले
 जाना तुम !

हर रोज़ इबादत में उसकी
 एक दिया जरुर
 जलाना तुम !

उन्नति के मद में
कहीं मगरूर न हो
जाना तुम!

भुला कर मुझको
मसरूफियत में अपनी 
खुद को भी  भूल न
 जाना तुम !

बढ़ते कदम थक कर
 थम जाएँ कभी
बस एक बार याद
मुझको कर लेना तुम !

*****नीता परिहार *****